*सोगड़ा अघोर आश्रम में खिला दुर्लभ पीला पलाश, हजारों लाल फूलों के बीच बना आकर्षण का केंद्र* *प्रकृति का अनोखा चमत्कार या जैविक बदलाव; ‘लक्ष्मण पलाश’ मानकर श्रद्धालु कर रहे पूजा*

*सोगड़ा अघोर आश्रम में खिला दुर्लभ पीला पलाश, हजारों लाल फूलों के बीच बना आकर्षण का केंद्र* *प्रकृति का अनोखा चमत्कार या जैविक बदलाव; ‘लक्ष्मण पलाश’ मानकर श्रद्धालु कर रहे पूजा*

*सोगड़ा अघोर आश्रम में खिला दुर्लभ पीला पलाश, हजारों लाल फूलों के बीच बना आकर्षण का केंद्र*  *प्रकृति का अनोखा चमत्कार या जैविक बदलाव; ‘लक्ष्मण पलाश’ मानकर श्रद्धालु कर रहे पूजा*

*सोगड़ा अघोर आश्रम में खिला दुर्लभ पीला पलाश, हजारों लाल फूलों के बीच बना आकर्षण का केंद्र*

*प्रकृति का अनोखा चमत्कार या जैविक बदलाव; ‘लक्ष्मण पलाश’ मानकर श्रद्धालु कर रहे पूजा*

लोक सीजी न्यूज / जशपुर 24 अप्रैल 2026 : छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले का प्रसिद्ध सोगड़ा आश्रम इन दिनों एक अनोखी प्राकृतिक घटना को लेकर चर्चा में है। आश्रम परिसर में हजारों लाल पलाश के पेड़ों के बीच एक दुर्लभ ‘पीला पलाश’ खिलने से यहां श्रद्धालुओं, प्रकृति प्रेमियों और वनस्पति विशेषज्ञों की भीड़ उमड़ रही है।

आमतौर पर फाल्गुन माह में जंगल लाल-नारंगी पलाश के फूलों से ढक जाते हैं, जिन्हें ‘जंगल की आग’ भी कहा जाता है। लेकिन इस बार आश्रम में खिला पीले रंग का पलाश लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है। वनस्पति विज्ञान में इसे Butea monosperma var. lutea के नाम से जाना जाता है, जो बेहद दुर्लभ माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार हजारों पेड़ों में कहीं एक ऐसा पेड़ प्राकृतिक रूप से विकसित होता है।

धार्मिक दृष्टि से भी इस फूल को विशेष महत्व दिया जा रहा है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इसे ‘लक्ष्मण पलाश’ कहा जाता है और यह सुख, शांति व समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। आश्रम में आने वाले श्रद्धालु इसे दैवीय कृपा मानकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

आश्रम प्रबंधन के अनुसार, यह स्थान पहले से ही आध्यात्मिक शांति और दुर्लभ वनस्पतियों के लिए प्रसिद्ध रहा है, लेकिन इस पीले पलाश के खिलने से इसकी महत्ता और बढ़ गई है। लोग इस अनोखे दृश्य को देखने और कैमरे में कैद करने के लिए दूर-दूर से पहुंच रहे हैं।

पीले रंग के भी होते हैं पलाश लेकिन दुर्लभ 

वनस्पति विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना आनुवंशिक परिवर्तन (जेनेटिक म्यूटेशन) के कारण होती है, जिससे फूलों का रंग लाल के बजाय पीला हो जाता है। यह दुर्लभ दृश्य न केवल प्रकृति की विविधता को दर्शाता है, बल्कि जशपुर क्षेत्र की समृद्ध जैव-विविधता का भी प्रमाण है।