ईसाई आदिवासी महासभा ने कहा, जशपुर के ईसाई फर्जी नहीं कहा इतिहास और कानून दोनों हमें वैध साबित करते हैं

ईसाई आदिवासी महासभा ने कहा, जशपुर के ईसाई फर्जी नहीं  कहा इतिहास और कानून दोनों हमें वैध साबित करते हैं
खड़कोना गांव के इसी स्थान से जशपुर जिले में पहली बार लोगों ने अपनाया था ईसाई धर्म

ईसाई आदिवासी महासभा ने कहा, जशपुर के ईसाई फर्जी नहीं

कहा इतिहास और कानून दोनों हमें वैध साबित करते हैं

लोक सीजी न्यूज / जशपुरनगर 23 नवंबर 2025 :- 21 नवंबर को जशपुर जिले के एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने सोशल मीडिया में बयान देते हुए, यह दावा किया था कि, जशपुर जिले में 1968 के धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत कोई भी व्यक्ति वैधानिक रूप से ईसाई नहीं बना है, इसलिए जशपुर के ईसाई फर्जी हैं। इस दावे के बाद कुछ लोगों ने काले झंडे दिखाते हुए शहर में ईसाईयों के प्रति विरोध प्रदर्शन भी किया था।
                   
                   इन आरोपों को ईसाई आदिवासी महासभा, जिला जशपुर ने पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है। महासभा के जिला अध्यक्ष वाल्टर कुजूर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि जशपुर के ईसाइयों का इतिहास सौ साल से भी पुराना है और उन्हें, फर्जी कहना अज्ञानता है।

1906 से 47 के बीच में हुआ था धर्म परिवर्तन

ईसाई समुदाय के नेता वाल्टर कुजूर ने बताया कि जशपुर रियासत में ईसाई धर्म अपनाने की शुरुआत 1906-07 में हुई थी। 1908 से 1947 के बीच लगभग 99 प्रतिशत ईसाई परिवारों के पूर्वज ईसाई बने। केवल करीब 1 प्रतिशत लोगों ने 1908 से 1947 की अवधि में धीरे-धीरे ईसाई धर्म अपनाया।
                     महासभा ने बताया कि यह पूरा समय ऐसा था जब किसी धर्म परिवर्तन के लिए सरकार को सूचना देने या किसी अधिनियम का पालन करने की जरूरत नहीं थी।

1968 का अधिनियम बाद में लागू हुआ

महासभा ने स्पष्ट किया कि धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 21 अक्टूबर 1968 से लागू हुआ था। 1968 के पहले हुए धर्मांतरण पर यह कानून लागू नहीं होता। इसलिए 1906-47 के धर्म परिवर्तन के कोई सरकारी दस्तावेज मिलना संभव नहीं है।

1858 की महारानी विक्टोरिया की घोषणा में थी धर्म की स्वतंत्रता

महासभा ने बताया कि 1858 में ब्रिटिश शासन की ओर से जारी घोषणा पत्र में धर्म की स्वतंत्रता, समान अधिकार और धार्मिक आधार पर भेदभाव न करने की गारंटी दी गई थी, जिसके आधार पर जशपुर रियासत में धर्म परिवर्तन पूरी तरह वैध था।

जशपुर के ईसाई उतने ही वैध हैं जितने देश-दुनिया के अन्य ईसाई

वाल्टर कुजूर ने कहा कि जशपुर के ईसाई उतने ही वैध हैं जितने देश-दुनिया के अन्य ईसाई। जशपुर के ईसाइयों को फर्जी कहना न केवल गलत है, बल्कि समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि, जिस तरह बाबा साहेब आंबेडकर ने 1956 में लाखों अनुयायियों के साथ वैध रूप से बौद्ध धर्म अपनाया, उसी तरह जशपुर के आदिवासियों ने 1906 से 1947 के बीच वैध रूप से ईसाई धर्म अपनाया है।
                   महासभा ने ऐसे भ्रामक दावे फैलाने वालों पर कार्रवाई की भी मांग की है।