15 बकरों की दी गई बलि, जिसे गांव के 400 पुरूषों ने खाया, अब गांव में मचा है हडक़ंप जिन बकरों की दी गई बलि उनमें से एक को रेबीज संक्रिमित कुत्ते ने काटा था, इसी बात को लेकर है संशय

15 बकरों की दी गई बलि, जिसे गांव के 400 पुरूषों ने खाया, अब गांव में मचा है हडक़ंप जिन बकरों की दी गई बलि उनमें से एक को रेबीज संक्रिमित कुत्ते ने काटा था, इसी बात को लेकर है संशय

15 बकरों की दी गई बलि, जिसे गांव के 400 पुरूषों ने खाया, अब गांव में मचा है हडक़ंप  जिन बकरों की दी गई बलि उनमें से एक को रेबीज संक्रिमित कुत्ते ने काटा था, इसी बात को लेकर है संशय
अब गांव में मचा है हडक़ंप

15 बकरों की दी गई बलि, जिसे गांव के 400 पुरूषों ने खाया, अब गांव में मचा है हडक़ंप

जिन बकरों की दी गई बलि उनमें से एक को रेबीज संक्रिमित कुत्ते ने काटा था, इसी बात को लेकर है संशय

लोक सीजी न्यूज / जशपुरनगर 30 दिसंबर 2025/ सरगुजा संभाग मुख्यालय के अंबिकापुर-प्रतापपुर मार्ग पर समीपस्थ ग्राम सरगवां में बलि के बकरों का मांस खाने के बाद हडक़ंप मचा हुआ है। गांव में १२ से १५ बकरों की बलि दी गई थी और इनके मांस को गांव के लगभग 400 पुरूषों ने खाया था। भय और हडक़ंप का कारण यह है, कि जिन बकरों की बलि दी गई थी उनमें से एक बकरे को रेबीज संक्रमित कुत्ते ने काटा था और बेचने वाले ने उस बकरे को भी बाकि बकरों के साथ बेच दिया था, जिनकी बलि दी गई और फिर उस मांस को पूरे गांव में बांटा और क्षाया गया।
               अब गांव के लोगों के किसी प्रकार के संक्रमण की जांच और रैबीज के टीके लगाने के लिए गांव में 31 दिसंबर को एहतियातन स्वास्थ्य शिविर लगाई जा रही है।
                    घटना के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार अंबिकापुर से लगे ग्राम सरगवां में 28 दिसंबर को निकाली पूजा का आयोजन किया गया था। इसमें 12 से 15 बकरों की बलि दी गई थी तथा गांव के लोगों को इनका मांस प्रसाद के रूप में खिलाया गया था। गांव के करीब 400 ग्रामीणों ने यह प्रसाद खाया था। इसी बीच पता चला कि इन बकरों में से एक को रेबीज संक्रमित कुत्ते ने काटा था। इससे गांव में हडक़ंप मच गया। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच नारायण प्रसाद व उपसरपंच कृष्णा सिंह द्वारा उक्त बकरों की खरीदी गांव के ही नान्हू राजवाड़े नाम के कारोबारी से की गई थी।

तीन सालों में एक बार होती है यह पूजा, बलि और प्रसाद का वितरण

इस संबंध में जो जानकारी मिली उसके अनुसार इस गांव, सरगवां में परंपरा के अनुसार हर तीसरे साल निकाली पूजा का आयोजन किया जाता है। इसमें स्थानीय देवी-देवताओं की पूजा की जाती है और फिर बकरों की बलि दी जाती है, और इस मांस प्रसाद के रूप में गांव के सिर्फ पुरुष सदस्य ही खाते हैं।

तेज तापमान में मांस को पकाने से रैबीज के वायरस मर जाते हैं

हालाकि इस संबंध में स्थानीय पशु चिकित्सक डॉ. चंदू मिश्रा का कहना है कि यदि किसी बकरे को रेबीज संक्रमित कुत्ते ने काट भी लिया, और उसका मांस ग्रामीणों ने अच्छी तरह से पकाकर खाया है, तो कोई दिक्कत नहीं है। तेज और उचित तापमान पर एक निर्धारित समय तक मांस को पकाने के बाद रैबीज के वायरस मर जाते हैं। लेकिन एहतियातन स्वास्थ्य जांच जरूरी है।
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