शोहादा-ए-कर्बला कॉन्फ्रेंस में गूंजा पैग़ाम-ए-हुसैन, आतंकवाद और ज़ुल्म के खिलाफ उठी आवाज़

मुहर्रम के सिलसिले में जिला मुख्यालय जशपुर के चीर बग़ीचा में एक रूहानी और ऐतिहासिक शोहदा-ए-कर्बला कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें सैंकड़ों की संख्या में लोगों ने शिरकत कर शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश किया।

शोहादा-ए-कर्बला कॉन्फ्रेंस में गूंजा पैग़ाम-ए-हुसैन, आतंकवाद और ज़ुल्म के खिलाफ उठी आवाज़
शोहादा-ए-कर्बला कॉन्फ्रेंस में गूंजा पैग़ाम-ए-हुसैन, आतंकवाद और ज़ुल्म के खिलाफ उठी आवाज़

शोहादा-ए-कर्बला कॉन्फ्रेंस में गूंजा पैग़ाम-ए-हुसैन, आतंकवाद और ज़ुल्म के खिलाफ उठी आवाज़

जशपुरनगर/लोक सीजी न्यूज़. मुहर्रम के सिलसिले में जिला मुख्यालय जशपुर के चीर बग़ीचा में एक रूहानी और ऐतिहासिक शोहदा-ए-कर्बला कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें सैंकड़ों की संख्या में लोगों ने शिरकत कर शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश किया। इस पुर-असर महफ़िल में देशभर से आए जाने-माने उलमा, सूफ़िया और शायरों ने हिस्सा लिया।

इस्लाम का असल पैग़ाम अमन, मोहब्बत और इंसानियत है

मुख्य अतिथि के तौर पर तशरीफ़ लाए जबलपुर म.प्र. से पीरे तरीक़त हज़रत सैयद अरशद रब्बानी साहब ने एक दिल को छू लेने वाली तक़रीर पेश की। अपने बयान में उन्होंने फ़रमाया “इस्लाम का असल पैग़ाम अमन, मोहब्बत और इंसानियत है। जो भी ज़ुल्म, नाइंसाफी और दहशतगर्दी की राह पर चले, वो इस्लाम का पैरोकार नहीं हो सकता। यज़ीद इस्लाम का नहीं, इंसानियत का दुश्मन था। दुनिया का सबसे पहला आतंकी यज़ीद था जिसने हक़ की आवाज़ को कुचलना चाहा, मगर हज़रत इमाम हुसैन ने अपनी जान देकर इस्लाम और इंसाफ़ को ज़िंदा रखा। हम हुसैनी हैं, यज़ीदी नहीं। हमारी तालीम क़ुरान और अहलेबैत की मोहब्बत से है, न कि नफ़रत और फसाद से। उन्होंने नौजवानों को पैग़ाम देते हुए कहा कि, दीन को समझो, सिर्फ लिबास या रस्मों तक महदूद मत करो। कर्बला सिर्फ एक मातम नहीं, बल्कि एक पैग़ाम है—ज़ुल्म के खिलाफ खड़ा होने का, और हक़ के लिए जान तक कुर्बान करने का। जब तक दुनिया में हुसैनी सोच ज़िंदा है, कोई यज़ीदियत सर उठा नहीं सकती।

इंसानियत के लिए आदर्श है हुसैन की कुर्बानी

मौलाना मंसूर आलम ने भी अपने बयान में हज़रत हुसैन की कुर्बानी को इंसानियत के लिए आदर्श बताया। उन्होंने कहा “कर्बला इंसाफ़, सच्चाई और सब्र का मरकज़ है। हमें हुसैनी बनकर नफरतों का जवाब मोहब्बत से देना है। जब तक हम कर्बला से सीखते रहेंगे, ज़ुल्म का मुकाबला कर सकेंगे।

 मनक़बत से गुलजार हुई महफ़िल

मौलाना अबरार क़ैसर, रेहान ख़ान रब्बानी, और मौलाना असरार अहमद ने अपने जज़्बाती अंदाज़ में मंक़बात-ए-हुसैन पेश की, जिससे पूरा माहौल रोशन और रूहानी हो गया। "लब्बैक या हुसैन" के नारों से महफ़िल बार-बार गूंज उठी।

कॉन्फ्रेंस में मुख्य रूप से हाफ़िज़ जन्नत कौसर, हाफ़िज़ आबिद हुसैन, हाफ़िज़ असलम, छत्तीसगढ़ राज्य वक़्फ़ बोर्ड के सदस्य फैज़ान सरवर खान, शब्बू क़ुरैशी, डॉ ज़ुल्फ़िक़ार सिद्दीक़ी, सैयद शकील सिद्दीक़ी, अधिवक्ता सिद्दीक आलम, महमूद क़ुरैशी, पत्रकार तनवीर क़ुरैशी, मोबीन खान, अब्दुल लतीफ अंसारी सहित सैंकड़ो की संख्या में लोग मौजूद थे।