चरित्र संदेह पर पत्नी की हत्या के आरोपी को उम्रकैद की सजा
चरित्र संदेह पर पत्नी की हत्या के आरोपी को उम्रकैद की सजा द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश कुनकुरी ने सुनाया फैसला, आरोपी सुरेश राम नायक को धारा 302 के तहत उम्रकैद और अर्थदंड की सजा
चरित्र संदेह पर पत्नी की हत्या के आरोपी को उम्रकैद की सजा
द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश कुनकुरी ने सुनाया फैसला, आरोपी सुरेश राम नायक को धारा 302 के तहत उम्रकैद और अर्थदंड की सजा
जशपुरनगर/लोक सीजी न्यूज. जशपुर जिले में एक दिल दहला देने वाले घरेलू हिंसा और हत्या के मामले में फैसला सुनाते हुए, कुनकुरी व्यवहार न्यायालय के द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश बलराम कुमार देवांगन ने पत्नी की निर्मम हत्या करने वाले आरोपी सुरेश राम नायक 36 वर्ष, को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस निर्णय ने एक ओर पीडि़त परिवार को न्याय दिलाया, वहीं समाज को यह स्पष्ट संदेश दिया कि स्त्री के चरित्र पर शंका कर उसकी हत्या कर देना किसी भी सूरत में क्षम्य नहीं है।
इस प्रकरण में अभियोजन की ओर से राज्य का प्रतिनिधित्व अपर लोक अभियोजक पुष्पा सिंह ने किया, जबकि बचाव पक्ष की ओर से विधिवेत्ता टी अख्तर ने आरोपी की ओर से पैरवी की।
यह था पूरा मामला
यह मामला कुनकुरी थाना क्षेत्र के ग्राम रेमते, सुखबासुपारा का है, जहां 11 दिसंबर 2022 की रात आरोपी सुरेश राम नायक ने अपनी पत्नी सुमित्रा बाई के साथ एक घरेलू विवाद के दौरान, चरित्र पर संदेह करते हुए सीमेंट की ईंट से सिर पर वार किया और फिर हाथों से उसके सीने पर मारपीट की। अत्यधिक रक्तस्राव और भीषण चोटों के चलते उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। यह एक ऐसा मामला था जिसमें संदेह, क्रोध और हिंसा का घातक मिश्रण सामने आया।
अदालत की दृष्टि में अपराध की गंभीरता
न्यायालय ने सभी साक्ष्यों, विशेषज्ञ गवाही, फॉरेंसिक रिपोर्ट और दोनों पक्षों की दलीलों पर विस्तार से विचार करते हुए यह निर्णय दिया कि आरोपी सुरेश राम नायक का कृत्य न केवल उसकी पत्नी के जीवन को समाप्त करने वाला है, बल्कि यह सामाजिक व्यवस्था और स्त्री अस्मिता के लिए भी गहन खतरा है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि मात्र संदेह के आधार पर किसी स्त्री की हत्या करना सभ्य समाज में किसी भी दृष्टिकोण से स्वीकार्य नहीं हो सकता।
इसलिएए अदालत ने आरोपी को धारा 302 के तहत दोषी करार देते हुए उम्र कैद और 1000 के अर्थदंड, साथ ही जुर्माना अदा न करने की स्थिति में अतिरिक्त 6 माह का सश्रम कारावास दिए जाने का आदेश पारित किया। साथ ही धारा 428 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत न्यायिक हिरासत की अवधि को सजा में समायोजित करने के निर्देश भी दिए।
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