एनएचएम कर्मचारियों का नियमितीकरण सहित 10 सूत्रीय मांगों को लेकर १२वें दिन भी हड़ताल जारी

12वें दिन भी जारी रहा एनएचएम कर्मचारियों का हड़ताल  एनएचएम कर्मचारियों का नियमितीकरण सहित 10 सूत्रीय मांगों को लेकर १२वें दिन भी हड़ताल जारी  संविदा कार्यकाल के 20 वर्ष बाद भी सुनवाई नहीं, दूसरी ओर सरकार दमन की कार्रवाही का डर दिखा रही

एनएचएम कर्मचारियों का नियमितीकरण सहित 10 सूत्रीय मांगों को लेकर १२वें दिन भी हड़ताल जारी
12वें दिन भी जारी रहा एनएचएम कर्मचारियों का हड़ताल 

12वें दिन भी जारी रहा एनएचएम कर्मचारियों का हड़ताल 

एनएचएम कर्मचारियों का नियमितीकरण सहित 10 सूत्रीय मांगों को लेकर १२वें दिन भी हड़ताल जारी 
संविदा कार्यकाल के 20 वर्ष बाद भी सुनवाई नहीं, दूसरी ओर सरकार दमन की कार्रवाही का डर दिखा रही

जशपुरनगर/लोक सीजी न्यूज. 

शासन हो या प्रशासन हो।
इसमे न कोई दुशासन हो।
प्यासे को पानी मिले।
और भूखे को राशन हो।
झूठे वायदे से कुछ नही।
सच्चाई वाला भाषण हो।
काम हो सब भलाई के।
सबके लिये सुखासन हो।
                शुक्रवार को जिला मुख्यालय जशपुर में रणजीता स्टेडियम के समक्ष, एनएचएम कर्मचारियों ने इस कविता से अपनी मांगों को लेकर अपनी अभिव्यक्ति दी।
       ज्ञात हो कि, शुक्रवार को भी एनएचएम कर्मचारियों का नियमितीकरण सहित 10 सूत्रीय मांगों को लेकर बाहरवें दिन भी पूरे उत्साह के साथ प्रदर्शन जारी रहा। संघ से शासन पक्ष से किसी प्रकार की पहल के संबंध में पूछे जाने पर बताया गया कि अभी तक शासन स्तर से किसी भी प्रकार से कोई सार्थक पहल नहीं की गई है। और नियमितीकरण सहित 10 सूत्रीय मांगों के लिए जो समिति बनाई गई के द्वारा व स्वास्थ्य मंत्री के द्वारा हमारी पांच मांगों के संबंध में मीडिया के के समक्ष जो वक्तव्य दिया जा रहा है कि, शासन ने हमारी पांच मांगों को पूरा कर दिया है, वह सरासर गलत है। शासन ने सिर्फ  एक मांग कार्य मूल्यांकन व्यवस्था में पारदर्शिता को ही पूरा किया गया है, शेष चार मांग में शासन ने अपनी दोहरी मानसिकता दिखाते हुए हमारे मूल मांग को तोड़-मरोड़ कर आदेश जारी किया है। अतएव मांग अपूर्ण है, और ऐसी स्थिति में हमारा हड़ताल से वापस लौट कर कार्य पर जाना संभव नहीं है। 

कर्मचारियों ने कहा, देश के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में लंबे समय से जारी, एड-हॉकिज्म, यानी अस्थायी और संविदा नियुक्तियों की प्रथा पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि अस्थायी लेबल के तहत नियमित श्रम का निरंतर शोषण जनता का विश्वास कमजोर करता है और यह संविधान द्वारा गारंटी दिए गए समान संरक्षण के अधिकार का उल्लंघन है। 
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