जबला एवं सखाझरण गांव में आजादी के 78 वर्ष बाद भी नहीं पहुंची बिजली

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में दिया आवेदन कहा गांव तक लग गए बिजली के खंबे लेकिन सालों बाद भी नहीं लगाया गया बिजली का तार

जबला एवं सखाझरण गांव में आजादी के 78 वर्ष बाद भी नहीं पहुंची बिजली
मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में ग्रामीणों द्वारा दी गई अर्जी

जबला एवं सखाझरण गांव में आजादी के 78 वर्ष बाद भी नहीं पहुंची बिजली

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में दिया आवेदन कहा गांव तक लग गए बिजली के खंबे लेकिन सालों बाद भी नहीं लगाया गया बिजली का तार 

ग्रामीणों का अल्टीमेटम, 3 महीने में गांव तक नहीं आई बिजली, तो करेंगे उग्र आंदोलन

साहीडांड से परेश दास की रिपोर्ट

लोक सीजी न्यूज़ नेटवर्क/ जशपुरनगर. मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर के जनपद पंचायत बगीचा से ग्राम पंचायत ताम्बाकच्छार के आश्रित ग्राम जबला एवं सखाझरण गांव में आजादी के 78 वर्ष बाद भी बिजली नही लगने पर काफी नाराजगी है। वर्तमान सरपंच रंजीत राम ने अपने लेटर पैड में मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में ग्रामीणों के हस्ताक्षर युक्त आवेदन दिया है।

         मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में दिए गए आवेदन के संबंध में चर्चा करते हुए दोनों गांव के ग्रामीणों ने बताया कि वो लोग, नेता, जनप्रतिनिधि और अधिकारियों से विद्युत् की मांग कर थक चुके हैं।

       विगत कई वर्षों से लगातार हर सत्ता के मंत्री, विधायक, नेता, अधिकारी से सौजन्य मुलाकात कर एवं आवेदन के माध्यम से अपने क्षेत्र मे बिजली की मांग करते अब थक चुके हैँ।किसी ने इस पंचायत के मूलभूत मांग पर रुचि नही ली, न ही ध्यान दिया।

* आश्वासन के शिवाय कुछ नही मिला*

ग्रामीणों ने बताया कि, चुनाव के समय हर पार्टी के नेता यहाँ के भोले भाले आदिवासी लोगों को हर सुविधा मुहैया कराने की घोषणा बिजली, पानी की सुविधा उपलब्ध कराने, बड़े बड़े वायदे कर केवल छल करते हैँ। विगत समय मे कुछ गांवों मे बिजली के खंभे तो लगे हैँ लेकिन न तार लगी न ही काम पूरा हुआ।

*125 परिवार की तीन महीने की चेतावानी बिजली नही लगी तो होगा उग्र आंदोलन*

 आजादी के 78 वर्ष से हमेशा ठगे जा रहे लगभग सवा सौ परिवार सरपंच के अगुवाई मे मुख्यमंत्री कार्यालय मे 6 जून को पुनः बिजली की मांग को लेकर तीन महीने के अंदर बिजली लगाने की मोहलत देते हुए चेतावनी दी है कि, अगर तीन महीने के अंदर उनके गांव में बिजली नही लगी तो उग्र आंदोलन करने की तैयारी की गई है।