छत्तीसगढ़ में तुअर, उड़द, मूंग, सोयाबीन और मूंगफली की एमएसपी पर खरीद को मंजूरी

छत्तीसगढ़ में तुअर, उड़द, मूंग, सोयाबीन और मूंगफली की एमएसपी पर खरीद को मंजूरी किसानों के हित में केंद्र सरकार का बड़ा निर्णय:दलहन एवं तिलहन उत्पादन को मिलेगा प्रोत्साहन किसानों के हितों की सुरक्षा हमारी शीर्ष प्राथमिकता - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

छत्तीसगढ़ में तुअर, उड़द, मूंग, सोयाबीन और मूंगफली की एमएसपी पर खरीद को मंजूरी

छत्तीसगढ़ में तुअर, उड़द, मूंग, सोयाबीन और मूंगफली की एमएसपी पर खरीद को मंजूरी

किसानों के हित में केंद्र सरकार का बड़ा निर्णय:दलहन एवं तिलहन उत्पादन को मिलेगा प्रोत्साहन

किसानों के हितों की सुरक्षा हमारी शीर्ष प्राथमिकता - मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय

लोक सीजी न्यूज / रायपुर 5 जनवरी 2026/भारत सरकार के ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर अवगत कराया है कि खरीफ विपणन वर्ष 2025–26 के दौरान छत्तीसगढ़ में दाल एवं तिलहनी फसलों की खरीद के लिए मूल्य समर्थन योजना (PSS) लागू करने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

केंद्रीय मंत्री द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार छत्तीसगढ़ में निम्नानुसार फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 21 हजार 330 मीट्रिक टन तुअर, 25 हजार 530 मीट्रिक टन उड़द, 240 मीट्रिक टन मूंग, 4 हजार 210 मीट्रिक टन सोयाबीन और 4 हजार 210 मीट्रिक टन मूंगफली खरीद की मंजूरी दी गई है।

किसानों को उपज का उचित मूल्य 

इन फसलों की खरीद मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जाएगी, जिससे किसानों को अपनी उपज का उचित दाम प्राप्त होगा। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने पत्र में आशा व्यक्त की है कि इस निर्णय से तुअर, उड़द, मूंग, सोयाबीन और मूंगफली उत्पादक किसानों को बड़ी राहत मिलेगी तथा उन्हें औने-पौने दाम पर फसल बेचने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्र सरकार के इस निर्णय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हितों की सुरक्षा हमारी शीर्ष प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एमएसपी पर खरीद की सभी तैयारियाँ समयबद्ध तरीके से पूर्ण कर किसानों को अधिकतम लाभ सुनिश्चित करेगी। इस निर्णय से राज्य के किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, दलहन एवं तिलहन उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी।